Vashikaran Kaise Karen

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वशीकरण साधना कैसे करें

 

  • साधना से साधक का चंचल मन एकाग्र होकर प्रेममय हो जाता है।
  • साधना उस पारस के समान है जो मानव मन रूपी लोहे को सोना बना देती है।
  • अगर हम साधना करें और किसी योग्य गुरु के समीप रहें तो हमारे भीतर अच्छे संस्कार होंगे।
  • मंत्र साधनामय होकर ही सिद्ध हो सकता है। इसलिए यह स्पष्ट हो जाता है कि कोई घड़ी अशुभ नहीं होती।
  • अगर हम साधना को किसी भी घड़ी में विवेक, लग्न एवं परिश्रम के साथ करें तो उसमें सफलता अवश्य मिलती है।
  • किसी कार्य में असफल होने पर समय को अशुभ कह देना उचित नहीं है।
  • इसके अलावा जब तक हम गुरुमय नहीं होंगे, तब तक साधना नहीं कर सकेंगे।
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  • यह संसार कर्म क्षेत्र है। यहां जन्म से लेकर मरण तक सभी काम कमी के फलस्वरूप ही संपन्न होते हैं।
  • सुख-दुख, अमीरी-गरीबी, यश- अपयश, विद्या तथा सांसारिक वस्तुएं आदि सब कर्माधीन हैं।
  • कर्मो का हमारे जीवन में सर्वाधिक महत्व है। इस जन्म और आगामी जन्मों में भी हमें अपने कर्मो का फल भोगना है।
  • इसलिए सोच-समझकर एवं सावधानीपूर्वक वही कर्म करने चाहिए जैसा हम आगामी जीवन प्राप्त करना चाहते हैं।
  • एक प्रकार से हमारा भूत, वर्तमान और भविष्य हमारे कर्मों पर आधारित है।
  • इसी से आप कर्मो के महत्व का अनुमान लगा सकते हैं।
  • योगियों, साधकों और संतों ने कमी की शक्ति, सर्वव्यापकता एवं महत्व के संबंध में मार्गदर्शन किया है।

 

इस विषय में ‘ ऋग्वेद ‘ कहता है-
एष धिया यात्यण्व्या शूरो रथेभि।
आशुभिः गच्छन्निन्द्रस्य निष्कृतत्।।

 

  • वशीकरण, आकर्षण एवं सम्मोहन एक जटिल क्रिया है।
  • इसके लिए लग्न, परिश्रम, एकाग्रता और सही गुरु के मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।
  • वशीकरण जितनी जटिल क्रिया है, तंत्र साधना के माध्यम से उतनी ही सरल हो जाती है।
  • वशीकरण, सम्मोहन एवं आकर्षण के लिए स्वयं प्रयत्न करें।
  • वशीकरण सूक्ष्म तरंगों पर आधारित क्रिया है।
  • इसके प्रभावी होने पर साधक के भीतर-बाहर जिस प्रकार का परिवर्तन होता है,
  • उसी प्रकार तंत्र में तांत्रिक साधना के मध्य पदार्थो, आकृतियों और मंत्रों के कारण साधक की विचार शक्ति की तरंगें अधिक तीव्र एवं अधिक शक्ति के साथ प्रसारित होती हैं।

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